नई दिल्ली । भारत के उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने भोजन, कृषि और व्यापार नीतियों की समय-समय पर लगातार समीक्षा करने की आवश्यकता पर जोर डाला। उन्होंने अधिक पोषण-युक्त भोजन के लिए कृषि से जुड़ी प्राथमिकताओं को सुधारने का भी आह्वान किया। नायडू ने एम. एस. स्वामीनाथन फाउंडेशन (एमएसएसआरएफ) द्वारा ‘विविध भोजन, पोषण एवं आजीविका के विज्ञान’ पर आयोजित की जा रही वर्चुअल परामर्श का उद्घाटन करते हुए खराब गुणवत्ता वाले आहार के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित किया और कहा कि अपर्याप्त पोषण और मोटापा दोनों ही गैर-संचारी रोगों के फैलने के हिसाब से हमारे लिए जोखिम भरा कारक हैं। उन्होंने कहा कि अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में निवेश करने के बजाय हमें खाद्य उत्पादों के पोषण मूल्य को बनाए रखने के लिए बेहतर भंडारण, प्रसंस्करण और संरक्षण में निवेश करना चाहिए। 
           उपराष्ट्रपति ने एक दूरदर्शी वैज्ञानिक और भारत की हरित क्रांति के सूत्रधार के रूप में प्रो. एम. एस. स्वामीनाथन की प्रशंसा की और इस बात पर खुशी जताई कि एमएसएसआरएफ का उद्देश्य कृषि और ग्रामीण विकास के लिए आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उपयोग में तेजी लाना है। उन्होंने एमएसएसआरएफ की विशेष रूप से गरीबोन्मुख, महिला समर्थक और प्रकृति संरक्षक दृष्टिकोण के लिए सराहना की और यह विश्वास प्रकट किया कि इस वर्चुअल परामर्श से खाद्य सुरक्षा और पोषण को बढ़ावा देने के लिए नई कार्यनीतियों और तरीकों को विकसित करने में मदद मिलेगी।
            उपराष्ट्रपति ने कहा कि वह डॉ. स्वामीनाथन के सुझावों का बारीकी से पालन करते हैं और संसद सहित जीवन के सभी स्तरों पर वे उनका पालन करते रहेंगे। नायडू ने महिलाओं को भूमि अधिकार प्रदान करने के डॉ. स्वामीनाथन के सुझाव का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भूमि अधिकार, पट्टा, और अन्य सभी संपत्ति संयुक्त रूप से पुरुष और महिला के नाम पर होनी चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करने का समय है। उन्होंने पूछा कि भूख से समाज को मुक्ति दिलाने (ज़ीरो हंगर) और अच्छे स्वास्थ्य एवं तंदुरूस्ती के लक्ष्यों को प्राप्त करने के संदर्भ में हमारी स्थिति क्या है। नायडू ने संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 2019 में दुनिया भर के लगभग 750 मिलियन लोगों के सामने खाद्य असुरक्षा की गंभीर स्थिति थी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में भूख से पीड़ित लोगों की संख्या हाल के वर्षों में धीरे-धीरे बढ़ रही है।
        उपराष्ट्रपति ने दुनिया में भूख से संबंधित इन चिंताजनक संकेतकों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए इससे बचने के उपायों को अलग तरीकों से और अधिक तेज़ी से करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर तत्काल, केंद्रित और ठोस कार्रवाई की जरूरत है। नायडू ने कहा कि भारत ने भूख, कुपोषण और शिशु मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि भारत सरकार ने देश में स्वास्थ्य और पोषण संबंधी समस्याओं से निपटने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।